- गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
रोहतक, 27 अगस्त: उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा कि गणेश महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए पर्यावरण संरक्षण और नहरी जल को प्रदूषण से बचाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान नहरों में प्रतिमाएं, निर्माल्य अथवा पूजा सामग्री प्रवाहित न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उपायुक्त सतबीर सिंह ने यह बात आज ‘सुनो नहरों की पुकार मिशन, रोहतक’ के प्रतिनिधियों द्वारा गणेश प्रतिमाओं एवं निर्माल्य सामग्री को नहरों में प्रवाहित होने से रोकने तथा वैकल्पिक विसर्जन व्यवस्था किए जाने संबंधी ज्ञापन सौंपे जाने के बाद कही।
उन्होंने कहा कि रोहतक से होकर गुजरने वाली नहरों का पानी पेयजल सहित विभिन्न आवश्यक कार्यों में उपयोग होता है। नहरों में प्रतिमाओं, पूजा सामग्री एवं अन्य अपशिष्ट के प्रवाह से जल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ जलीय जीवों और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए धार्मिक आयोजन के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाना भी हम सभी का दायित्व है। सतबीर सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि गणेश महोत्सव के दौरान प्रतिमा विसर्जन के लिए जिले में उपयुक्त कृत्रिम/निर्धारित विसर्जन कुंड तथा वैकल्पिक छोटे-बड़े तालाबों की व्यवस्था एवं उनकी आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की जाए। साथ ही श्रद्धालुओं को इन निर्धारित स्थलों पर ही प्रतिमाओं का विसर्जन करने के लिए प्रेरित किया जाए।
उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा कि गणेश महोत्सव से पहले आमजन में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि श्रद्धालु पर्यावरण-अनुकूल छोटी मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता दें और पूजा के बाद निर्माल्य सामग्री को नहरों में प्रवाहित करने के बजाय निर्धारित स्थानों पर जमा करवाएं। जिला प्रशासन इस संबंध में सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों का भी सहयोग लेगा।
उपायुक्त ने कहा कि गणेश महोत्सव के दौरान नहरों एवं संबंधित स्थानों पर आवश्यक सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि प्रतिमाओं अथवा पूजा सामग्री को नहरों में प्रवाहित होने से रोका जा सके। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दें और जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन स्थलों का ही उपयोग करें। उन्होंने ‘सुनो नहरों की पुकार मिशन’ द्वारा नहरों एवं जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए किए जा रहे जागरूकता प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जल संरक्षण एवं स्वच्छता के लिए प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं का आपसी सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। सामूहिक प्रयासों से ही नहरों के जल को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त रखा जा सकता है। इस दौरान सुनो नहरों की पुकार मिशन के संस्थापक मुख्य संरक्षक एवं जाट कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ जसमेर सिंह, मिशन के वरिष्ठ सदस्य जवाहरलाल नेहरू कैनाल फीडर रोहतक के कार्यकारी अभियंता रामनिवास, सामाजिक कार्यकर्ता ईश्वर सिंह दलाल व राजबीर सिंह कालीरमन आदि मौजूद थे।




