केन्द्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन ने गुजरात के एकता नगर में आयोजित किए जाने वाले राष्ट्रीय एकता दिवस 2026 तथा भारत पर्व 2026 की तैयारियों पर नई दिल्ली में आज एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।

मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह सचिव ने कहा कि इस वर्ष की एकता परेड अधिक भव्य, विविधतापूर्ण और आकर्षक होगी। यह कार्यक्रम 31 अक्टूबर को होगा और इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि देने के साथ होगी। एकता परेड शाम के समय आयोजित की जाएगी। इस परेड में 2026 में भारत को नक्सलवाद से मुक्त कराने की महत्वपूर्ण उपलब्धि को प्रमुखता दी जाएगी। 30 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी 'आनंदमठ' की थीम पर आधारित नाट्य प्रस्तुति के दौरान भी मौजूद रहेंगे।

श्री गोविंद मोहन ने कहा कि एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह की योजना दो उद्देश्यों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। पहला उद्देश्य देश के पुलिस बलों, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और केन्द्रीय पुलिस संगठनों (CPOs) द्वारा किए जा रहे असाधारण कार्यों को राष्ट्र के सामने लाना है। दूसरा उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों से लोगों को आमंत्रित करना है, ताकि वे एकता नगर के आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य और सरदार वल्लभभाई पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का आनंद ले सकें। उन्होंने कहा कि एकता नगर के आसपास कई अन्य आकर्षण भी विकसित किए गए हैं और अब यह देश के सबसे प्रमुख तथा आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक बनकर उभरा है।

केन्द्रीय गृह सचिव ने कहा कि एकता दिवस की परेड में हम देश में सशस्त्र नक्सलवाद के समाप्त होने की उपलब्धि का जश्न मनाएंगे। उन्होंने बताया कि यह तीन विभिन्न और विशिष्ट प्रस्तुतियों के जरिए किया जाएगा:

इस वर्ष की परेड में राज्य पुलिस बलों और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) की टुकड़ियाँ शामिल होंगी, जो देश में सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे रही हैं। 31 अक्टूबर 2026 को जब ये टुकड़ियाँ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सामने से गुजरेंगी, तब कई LED स्क्रीन पर एक लघु फिल्म दिखाई जाएगी, जिसमें उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के मुख्य बिंदुओं का सार प्रस्तुत किया जाएगा।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) लगभग 2,000 कलाकारों की टीम के साथ एक प्रस्तुति देगा। ये कलाकार देश के उन 126 जिलों से चुने गए हैं, जहाँ कभी सशस्त्र नक्सलवाद मौजूद था। ये कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के जरिए उन कठिनाइयों और संघर्षों को दिखाएंगे, जिनसे उन्हें तब जूझना पड़ा जब सशस्त्र नक्सलवाद अपने चरम पर था और उनकी जान तथा संपत्ति को खतरा बना रहता था।

इन 126 जिलों से लगभग 5,000 लोगों को आमंत्रित किया गया है। ये सभी कार्यक्रमों के दर्शक बनेंगे और अपनी बातचीत के माध्यम से सशस्त्र नक्सलवाद के दौर के अपने अनुभव भी साझा करेंगे।

केन्द्रीय गृह सचिव ने कहा कि इन तीन पहलुओं के माध्यम से हम सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ भारत के संघर्ष और नक्सलवाद की समाप्ति को देखेंगे। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि उग्रवाद और हिंसा की जगह आज इन जिलों में विकास की लहर चल रही है।

श्री गोविंद मोहन ने कहा कि राष्ट्रीय एकता दिवस उत्सव की एक अन्य थीम वंदे मातरम है। उन्होंने बताया कि यह वंदे मातरम का 150वां वर्ष है और इस वर्ष की परेड में कई नई विशेषताएँ वंदे मातरम से प्रेरित होकर शामिल की गई हैं।

गृह सचिव ने कहा कि इस वर्ष के उत्सवों की एक और नई बात यह है कि परेड और सभी प्रस्तुतियाँ शाम के समय आयोजित होंगी। उन्होंने बताया कि दिन में तापमान अधिक होने के कारण कार्यक्रमों को शाम को आयोजित करने का फैसला किया गया है, ताकि ये और अधिक रोमांचक और आकर्षक बन सकें।

केन्द्रीय गृह सचिव ने कहा कि आमतौर पर झाँकियाँ सरकारी मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों या अन्य सरकारी संस्थाओं द्वारा तैयार और डिज़ाइन की जाती हैं। इस बार यह तय किया गया है कि झाँकियों के डिज़ाइन और विशेषताएँ राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं के जरिए आमंत्रित की जाएँ, जो MyGov पर राष्ट्रीय स्तर पर और गुजरात के प्रत्येक जिले में आयोजित की गईं।

श्री गोविंद मोहन ने कहा कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं से मिले सभी थीम और डिज़ाइनों को मिलाकर इनके आधार पर कुल 15 झाँकियाँ तैयार की जाएँगी। ये डिज़ाइन पूरी तरह आम लोगों द्वारा बनाए जाएँगे और इनमें किसी सरकारी मंत्रालय या विभाग की कोई भूमिका नहीं होगी। श्री मोहन ने कहा कि हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जहाँ महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की झाँकियों में सरकारी संस्थाओं और राज्य सरकारों की तयशुदा थीमों के बजाय भारत के आम नागरिकों की आकांक्षाएँ झलकें। पहली बार, लोगों की आकांक्षाओं को झांकियों के माध्यम से दर्शाया गया है और इन्हें एकता नगर में देखा जा सकेगा।

केन्द्रीय गृह सचिव ने कहा कि इस बार एक और महत्वपूर्ण बदलाव सांस्कृतिक कार्यक्रम में किया गया है। अब तक सांस्कृतिक कार्यक्रम संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जाता था, लेकिन इस बार हमने गुजरात के लोगों को इसमें शामिल किया है। गुजरात में देश के विभिन्न राज्यों से आए ऐसे समूह हैं, जो पीढ़ियों से वहाँ रह रहे हैं और गुजरात को अपना घर मान चुके हैं। हमने इन समूहों से संपर्क किया और उनसे कहा कि वे अपने मूल राज्यों की प्रस्तुतियों के आधार पर अपने सांस्कृतिक कार्यक्रम तैयार करें। लगभग 50 ऐसे तत्वों को मिलाकर हमने एक सांस्कृतिक प्रस्तुति तैयार की है, जिसमें करीब 5,000 कलाकार भाग लेंगे। यह ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसे भी यहाँ प्रदर्शित किया जाएगा।

श्री गोविंद मोहन ने कहा कि पिछले वर्ष से हम राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा तैयार किए गए एक बड़े नाटक का आयोजन कर रहे हैं। पिछले वर्ष की थीम सरदार पटेल पर थी। प्रधानमंत्री के समक्ष होने वाली नाट्य प्रस्तुति की थीम श्री बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के युगांतरकारी उपन्यास ‘आनंदमठ’ पर आधारित होगी। यह नाटक 'आनंदमठ' के उस शाश्वत दर्शन पर आधारित होगा, जिसके अनुसार देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के प्रति हर भारतीय की जिम्मेदारी है, उसे अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक होना चाहिए और राष्ट्र की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्रिय भागीदार बनना चाहिए।