रेल मंत्रालय ने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित साल भर के समारोह के चौथे चरण (समापन सप्ताह, 1 -7 नवंबर 2026) के तहत आज रेल भवन में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ श्री सतीश कुमार, बोर्ड के सदस्य, महानिदेशक तथा अन्य वरिष्ठ रेल अधिकारी उपस्थित रहे।
साल भर चले इस समारोह को राष्ट्रीय गीत से जुड़ी राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाली विभिन्न गतिविधियों की श्रृंखला के माध्यम से चार चरणों में आयोजित किया गया था।
पहला चरण: वंदे मातरम का सामूहिक गायन
पहले चरण की शुरुआत 7 नवंबर 2025 को रेल भवन के सम्मेलन कक्ष में वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुई। इस कार्यक्रम में केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव उपस्थित थे।
दूसरा चरण: निबंध प्रतियोगिता
22 जनवरी 2026 को रेलवे बोर्ड में "वंदे मातरम्: भारत की विविधता में एकता की भावना" विषय पर एक निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसने प्रतिभागियों को राष्ट्रीय गीत के महत्व और इसके एकता के संदेश पर विचार करने का अवसर प्रदान किया।
तीसरा चरण: क्विज़ प्रतियोगिता और तिरंगा रैली
वंदे मातरम् की 150 वर्षों की यात्रा पर आधारित एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 10 अगस्त 2026 को रेलवे बोर्ड में आयोजित की गई। इसके साथ ही रेल भवन परिसर में केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में एक तिरंगा रैली भी निकाली गई। इस रैली में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ श्री सतीश कुमार, बोर्ड के सदस्यों, महानिदेशकों तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
चौथा चरण: विजेताओं का सम्मान और समापन कार्यक्रम
5 नवंबर 2026 को आयोजित कार्यक्रम के दौरान दूसरे चरण में आयोजित निबंध प्रतियोगिता तथा तीसरे चरण में आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार और योग्यता प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
साल भर चले समारोह के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों के सफल आयोजन में योगदान देने के लिए रेलवे बोर्ड सांस्कृतिक समूह को भी सम्मानित किया गया। उनके प्रयासों की सराहना करते हुए समूह को पुरस्कार के साथ योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
वंदे मातरम् की भावना एकता, समर्पण और सामूहिक प्रयास के मूल्यों को निरंतर प्रेरित करती रही है। ये मूल्य भारतीय रेल की कार्यप्रणाली में भी परिलक्षित होते हैं। इस आयोजन ने रेल अधिकारियों की उस प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया, जिसके तहत वे अत्यंत निष्ठा, सत्यनिष्ठा और दक्षता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए भारतीय रेल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अपना योगदान दे रहे हैं।
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