रमेश कुमार (बदला हुआ नाम) के लिए एनएपीडीडीआर योजना का अर्थ केवल नशा मुक्ति संबंधी उपचार तक पहुंच हासिल करना ही नहीं है। इसने उन्हें नशे की लत से उबरने, अपना आत्मविश्वास वापस पाने और सम्मान के साथ पुनः अपना जीवन संवारने का अवसर दिया है।

उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि नशे की लत से बाहर निकलने और समाज में पुनः शामिल होने के लिए सही समय पर सहायता मिलना, पेशेवर तरीके से पुनर्वास, परिवार का साथ और समय-समय पर देखभाल कितनी महत्वपूर्ण है।

तेलंगाना के पेड्डापल्ली जिले के रहने वाले 40 वर्षीय रमेश कुमार को शराब की लत के कारण अपने व्यक्तिगत जीवन, परिवार और कामकाज में कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जवानी के दिनों में साथियों के दबाव और समाज के नकारात्मक प्रभावों के कारण उन्होंने शराब पीना शुरू किया था जो धीरे-धीरे गंभीर लत बन गई। समय के साथ उनके स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों, व्यवहार और रोजगार पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा।

वे मानसिक रूप से अत्यंत परेशान रहने लगे, सामाजिक गतिविधियों से दूर हो गए और अपनी आर्थिक स्थिति तथा कामकाज को जारी रखने के लिए संघर्ष करने लगे। इन तमाम परेशानियों के बावजूद वे उपचार कराने और अपना जीवन पुनः संवारने के लिए इच्छुक रहे। इस पूरी यात्रा में उनके परिवार ने भी उन्हें निरंतर भरपूर सहयोग जारी रखा।

उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन तब आया जब सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के अंतर्गत उन्हें सहायता मिली। तेलंगाना के पेड्डापल्ली में 'प्रकृति एनवायरनमेंट सोसाइटी' की ओर से चलाए जा रहे नशे के आदी लोगों के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्र (आईसीआरए) के माध्यम से उन्हें नशा मुक्ति का पूरा उपचार और पुनर्वास सेवाएं मिलीं।

इस सहायता में डॉक्टरों की देखरेख, व्यक्तिगत और पारिवारिक परामर्श, समूह चिकित्सा, प्रेरणादायक सत्र, दोबारा नशे की लत में न फंसने के लिए चिकित्सा और नियमित फॉलो-अप सत्र शामिल थे।

पुनर्वास कार्यक्रम ने उन्हें मुश्किलों से निपटने के तरीके सिखाए, उनका आत्मविश्वास वापस दिलाया और नशे की लत से जुड़ी भावनात्मक और मानसिक चुनौतियों का सामना करने में सहायता की। उन्हें कामकाज से जुड़ी सलाह, चिकित्सा सहायता और समाज में फिर से घुलने-मिलने के लिए भी सहयोग मिला। लगातार काउंसलिंग और परिवार की भागीदारी ने शराब की लत से उबरने के उनके संकल्प को मजबूत किया और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने में सहायता की।

इस हस्तक्षेप से उनके निजी और पेशेवर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। रमेश ने शराब की लत पर सफलतापूर्वक विजय पा ली है। अब वे शराब नहीं पीते और नियमित रूप से काम कर रहे हैं।

उनका रोजगार अब अधिक स्थिर हो गया है और वे अभी प्रतिमाह लगभग 12,000 से 15,000 रुपये अर्जित कर रहे हैं। स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और आर्थिक स्थिरता में आए सुधार से उनकी पारिवारिक स्थितियां भी बेहतर हुई हैं।

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