केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) तथा ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) द्वारा आयोजित एक उच्च स्तरीय सीईओ गोलमेज सम्मेलन 'भारत कॉमर्स चिंतन शिविर' की अध्यक्षता की। इस गोलमेज सम्मेलन में ओएनडीसी डिजीदुकान के माध्यम से भारत के जनरल ट्रेड इकोसिस्टम को मजबूत करने और उसके डिजिटलीकरण के साझा रोडमैप पर विचार-विमर्श करने के लिए प्रमुख फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियों के 40 से अधिक लीडर्स एक साथ आए।

गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा, “ओएनडीसी का 'डिजीदुकान' यह दर्शाता है कि जब छोटे खुदरा विक्रेताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर ओपन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाता है, तो लोग इसे अपनाते हैं। इसे एक और ऐसा केस स्टडी बनने दें जिससे दुनिया भारत से सीख सके। अपने वितरकों को मजबूत करने के साथ-साथ खरीद प्रक्रिया को सरल और अधिक पारदर्शी बनाकर, हम किराना दुकानों को वर्किंग कैपिटल मुक्त करने और आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं। मैं एफएमसीजी उद्योग को एक साथ मिलकर काम करने और इसे भारत के हर कोने तक ले जाने के लिए आमंत्रित करता हूं।”

उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा, “भारत के रिटेल इकोसिस्टम, विशेष रूप से किराना दुकानों के इसके विशाल नेटवर्क के डिजिटलीकरण को गति देने में ओपन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण भूमिका है। ओएनडीसी का डिजीदुकान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो यह दर्शाता है कि कैसे एक ओपन और इंटरऑपरेबल नेटवर्क पड़ोस के खुदरा विक्रेताओं को डिजिटल खरीद के अवसरों तक पहुँच बनाने और उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था में अधिक प्रभावी ढंग से भाग लेने में सक्षम बना सकता है। खुदरा विक्रेताओं, एफएमसीजी कंपनियों और वितरकों को एक साझा नेटवर्क पर लाकर, डीपीआईआईटी और ओएनडीसी मिलकर एक अधिक जुड़े हुए और कुशल जनरल ट्रेड इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं, जिससे बड़े पैमाने पर किराना दुकानों तक डिजिटलीकरण पहुँच रहा है।”

चर्चा में जनरल ट्रेड इकोसिस्टम को मजबूत करने और फिर से सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो भारत की रिटेल अर्थव्यवस्था का केंद्र है और लाखों पड़ोस के खुदरा विक्रेताओं की आजीविका का समर्थन करता है। प्रतिभागियों ने डिजिटल खरीद को बढ़ावा देने, आपूर्ति-श्रृंखला की दक्षता में सुधार करने और किराना दुकानों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए एफएमसीजी कंपनियों, वितरकों और उद्योग के हितधारकों की ओर से अधिक संस्थागत प्रतिबद्धता की आवश्यकता पर बल दिया। इस पहल का उद्देश्य साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, साझा सेवाओं और व्यावसायिक रूप से टिकाऊ मॉडलों के माध्यम से उद्योग के हितधारकों को एक साथ लाना है।

गोलमेज सम्मेलन में हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल), कोका-कोला इंडिया, आईटीसी, पी एंड जी, मैरिको, कैविनकेयर, पिडिलाइट, ब्रिटानिया, अडानी विल्मर, एलटी फूड्स, अनमोल इंडस्ट्रीज, हल्दीराम, इमामी, वीबा और निलोंस के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं, प्रौद्योगिकी भागीदारों और ओएनडीसी नेटवर्क प्रतिभागियों के प्रतिनिधियों के साथ भाग लिया।

ओएनडीसी डिजीदुकान किराना दुकानदारों को खरीदार के रूप में डिजिटल बनाकर उनकी खरीद संबंधी समस्याओं का समाधान करता है। एक ही डिजिटल इंटरफ़ेस के माध्यम से, खुदरा विक्रेता कीमतों, ट्रेड स्कीम्स और उत्पादों की उपलब्धता की स्पष्ट जानकारी के साथ विभिन्न ब्रांडों, वितरकों और थोक विक्रेताओं से उत्पादों की खोज कर सकते हैं और उन्हें ऑर्डर कर सकते हैं। इस पहल को मौजूदा वितरण संबंधों को बदलने के बजाय उन्हें मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, साथ ही यह एक साझा डिजिटल आधार तैयार करती है जिसके माध्यम से खुदरा विक्रेता अंततः साझा लॉजिस्टिक्स, औपचारिक ऋण और अन्य सेवाओं तक पहुँच प्राप्त कर सकते हैं। यह दृष्टिकोण जनरल ट्रेड वैल्यू चेन में भागीदारी की जटिलता और लागत को कम करने का प्रयास करता है।

गोलमेज सम्मेलन में जनरल ट्रेड इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें शामिल हैं: किराना खुदरा विक्रेताओं के लिए एक साझा डिजिटल पहचान विकसित करना ताकि वे कई ब्रांडों, वितरकों और सेवा प्रदाताओं से आसानी से जुड़ सकें; मौजूदा डिलीवरी रूटों से बाहर के क्षेत्रों सहित वितरकों की पहुँच में सुधार करने और अगले दिन विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए साझा लॉजिस्टिक्स और माइक्रो-वेयरहाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना; तथा वर्किंग कैपिटल तक पहुँच सुधारने और अनौपचारिक वितरक क्रेडिट पर निर्भरता कम करने के लिए डिजिटल खरीद एवं लेन-देन गतिविधियों से जुड़े वित्तीय समाधानों के माध्यम से औपचारिक ऋण तक पहुँच का विस्तार करना।

चर्चा में ऑनबोर्डिंग की जटिलता को कम करने और व्यापक उद्योग भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए प्लग-एंड-प्ले डिस्ट्रीब्यूटर मैनेजमेंट सिस्टम (डीएमएस) कनेक्टर्स, मानकीकृत कैटलॉग और साझा डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन को सरल बनाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। इसके अलावा, प्रतिभागियों ने एफएमसीजी कंपनियों, बिक्री टीमों, वितरकों और चैनल भागीदारों के लिए वाणिज्यिक प्रोत्साहनों को पुनर्गठित करने पर विचार-विमर्श किया ताकि डिजिटल ऑर्डरिंग, व्यापक खुदरा कवरेज और निरंतर खुदरा अपनाने को पूरी वैल्यू चेन में व्यावसायिक रूप से लाभदायक बनाया जा सके।

सितंबर 2026 तक, डिजीदुकान ने हैदराबाद, जयपुर और मुंबई में 450 से अधिक ब्रांडों के साथ 21,000 से अधिक खुदरा विक्रेताओं को जोड़ा है, जबकि पिछली तिमाही में यह संख्या 12,000 से अधिक थी। हैदराबाद में 16,000 से अधिक खुदरा विक्रेताओं को जोड़ा जा चुका है, जहाँ मासिक रिपीट ऑर्डरिंग दर 73-78% है। ओएनडीसी के एक शुरुआती रिटेलर अध्ययन में यह भी पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल 40% खुदरा विक्रेताओं ने डिजीदुकान के माध्यम से खरीदे गए उत्पादों के लिए कम इन्वेंट्री रखने की बात कही, जो वर्किंग कैपिटल एफिशिएंसी में सुधार की संभावना को दर्शाता है।

श्री सुनील जे. सिंघी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (एनटीडब्लूबी) किराना खुदरा विक्रेताओं के बीच डिजीदुकान को अपनाने में तेजी लाने के लिए ओएनडीसी के साथ मिलकर काम कर रहा है। यह सहयोग स्थानीय व्यापार संघों को लामबंद करने, खुदरा विक्रेताओं की भागीदारी को मजबूत करने और छोटे व्यवसायों को डिजिटल खरीद एवं अधिक कुशल वितरण नेटवर्क से लाभ उठाने में सक्षम बनाने पर केंद्रित है।

ओएनडीसी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री विभोर जैन ने कहा, “डिस्ट्रीब्यूटर कम्युनिटी के लिए डिजिटल अपनाव का विकास हो रहा है - बिलिंग, प्रिंटिंग, ऑर्डर देना काफी हद तक ऑनलाइन हो चुका है। लेकिन खुदरा विक्रेता, जिनमें से अधिकतर मॉम-एंड-पॉप दुकानें हैं, वे अब भी पेन, कागज और याददाश्त के भरोसे चल रहे हैं। 'डिजीदुकान' रिटेल में भारत के जनरल ट्रेड इकोसिस्टम के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का ओएनडीसी का एक प्रयास है। हम मौजूदा वितरक नेटवर्क को बदलने के बजाय उसे मजबूत करते हुए, किराना दुकानदारों को खरीदार के रूप में डिजिटल बना रहे हैं।”

डिजीदुकान एफएमसीजी ब्रांडों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और लॉजिस्टिक्स भागीदारों का एक विस्तारशील नेटवर्क तैयार कर रहा है। एचयूएल, मैरिको, कोलगेट-पामोलिव, इमामी और अमूल जैसी प्रमुख एफएमसीजी कंपनियां अपने वितरण नेटवर्क के माध्यम से इसमें भाग ले रही हैं, जबकि आईटीसी, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और ब्रिटानिया इंटीग्रेशन या बातचीत के विभिन्न चरणों में हैं। प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर, पेटीएम फॉर बिजनेस, क्विपो और मल्टिप्लाई.एआई नेटवर्क पर लाइव हैं, जबकि बिज़ोम, बॉट्री, क्विडपे और ईएनएस सहित डीएमएस एवं प्रौद्योगिकी प्रदाता एकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इलास्टिकरन, शिपरॉकेट, इंडिया पोस्ट और मूविंग सहित लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग पार्टनर भी इस बढ़ते इकोसिस्टम का हिस्सा हैं, जो किराना खुदरा विक्रेताओं के लिए सहज खरीद, व्यापक वितरक पहुँच और तेजी से माल की आपूर्ति में सहयोग कर रहे हैं।

अपने अगले चरण के हिस्से के रूप में, ओएनडीसी मौजूदा बाजारों में परिचालन को मजबूत करने के साथ-साथ मुंबई, विशेष रूप से उत्तरी मुंबई में ब्रांड और वितरक भागीदारी को गहरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) भारत में एक नेटवर्क मॉडल के माध्यम से ओपन डिजिटल कॉमर्स इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है, जिसका उद्देश्य इंट्री बैरियर को कम करना और व्यवसायों के लिए पहुँच में सुधार करना है। रिटेल को अपने मुख्य केंद्र बिंदु के रूप में रखते हुए, इस नेटवर्क ने अब तक 500 मिलियन से अधिक लेनदेन को सक्षम बनाया है। इसका उद्देश्य ऐसे डिजिटल नेटवर्क बनाना है जो दक्षता में सुधार करें, लागत कम करें और व्यवसायों, गिग वर्कर, छोटे खुदरा विक्रेताओं तथा उपभोक्ताओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलें।

ओएनडीसी-सक्षम खुदरा पहलों में 'डिजीदुकान' शामिल है, जिसने व्यवसाय-से-व्यवसाय (बी टू बी) खरीद के डिजिटलीकरण के लिए 21,000 से अधिक खुदरा विक्रेताओं को ऑनबोर्ड किया है, और अमेजिंग इंडिया शामिल है, जो किसानों, कारीगरों, सहकारी समितियों और अन्य सूक्ष्म उत्पादकों के उत्पादों को ई-कॉमर्स-रेडी बनाने तथा व्यापक बाजारों तक पहुँचाने पर केंद्रित है।

अन्य पहलों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं शामिल हैं, जो 40 से अधिक उपभोक्ता अनुप्रयोगों (ऐप्स) के माध्यम से दैनिक 5 लाख से अधिक मेट्रो और बस यात्राओं को सुगम बनाती हैं; 80,000 से अधिक व्यापारियों तथा 30 से अधिक छोटे एवं सूक्ष्म फ्लीट ऑपरेटरों द्वारा उपयोग किया जाने वाला लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर; और नेटवर्क पर उपलब्ध 1,000 से अधिक पर्यटन अनुभव, जिनमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के 170 स्मारक और 29 संग्रहालय शामिल हैं। ओएनडीसी ने वित्तीय पहुँच का विस्तार करने के उद्देश्य से लो-टिकट वाले निवेश और ऋण समाधानों को भी सक्षम बनाया है, जिसमें अधिकांश निवेशक टियर-2 शहरों और उससे आगे के क्षेत्रों से आते हैं।