पीएम-किसान योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की राशि तीन किस्तों में प्रदान की जाती है, जिससे कृषि निवेश और घरेलू वित्तीय स्थिरता को समर्थन मिलता है। इसकी 24वीं किस्त के अंतर्गत 9.34 करोड़ किसानों को 18,690 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की गई, जिससे कुल संचयी वितरण 4.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। आधार से जुड़े बैंक खाते, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, ई-केवाईसी और डिजिटल सत्यापन पारदर्शिता को मजबूत करते हैं तथा बिचौलियों की भूमिका को कम करते हैं। इस योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है। इस योजना से किसानों की आय सुरक्षा के लिए निरंतर सहायता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता और मजबूत होती है।
पीएम-किसान: किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत बनाना
सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को गुजरात के बनासकांठा में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 24वीं किस्त जारी की। 9.34 करोड़ से अधिक पात्र किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता के रूप में लगभग 18,690 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से हस्तांतरित की गई, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हुई और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई। इस योजना को ‘अन्नदाता सम्मान’ सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल माना जाता है।
हाल ही में, जुलाई 2026 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएम-किसान योजना को वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक जारी रखने को मंजूरी दी। इस अवधि के दौरान योजना के लिए कुल 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया गया है। यह मंजूरी सरकार की इस प्रतिबद्धता को दोहराती है कि किसानों की समृद्धि ही राष्ट्र की समृद्धि का आधार है।
पीएम-किसान योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता
पीएम-किसान एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे 24 फरवरी, 2019 को शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य देशभर में कृषि योग्य भूमि रखने वाले किसान परिवारों को सुनिश्चित आय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत, प्रत्येक पात्र किसान परिवार को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। यह राशि 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में उनके आधार से जुड़े बैंक खातों में जमा की जाती है।
पीएम-किसान योजना के तहत प्रदान की जाने वाली सहायता ने किसानों को बीज, उर्वरक, सिंचाई, कृषि मशीनरी और अन्य कृषि संबंधी आवश्यकताओं में समय पर निवेश करने में सक्षम बनाया है। इससे किसानों की उत्पादक क्षमता में वृद्धि हुई है, अनौपचारिक ऋण पर उनकी निर्भरता कम हुई है और ग्रामीण परिवारों की वित्तीय स्थिरता मजबूत हुई है।
अब तक, देशभर के पात्र किसान परिवारों को 24 किस्तों के माध्यम से 4.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। भूमि अभिलेखों को पीएम-किसान पोर्टल पर जोड़े जाने के बाद ही किसानों को इस योजना का लाभ प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, किसानों के लिए अपने बैंक खातों को आधार से लिंक करना और ई-केवाईसी सत्यापन पूरा करना भी अनिवार्य है। किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, केंद्रीय बजट 2026-27 में पीएम-किसान योजना के लिए 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
इस योजना का उद्देश्य कृषि संबंधी इनपुट के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके छोटे और सीमांत किसानों की आय में वृद्धि करना है। इससे फसलों के स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार लाने में मदद मिलती है। प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करने से किसानों की अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलती है और कृषि गतिविधियों को निरंतर जारी रखने में सहायता मिलती है। पीएम-किसान विश्व स्तर पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। यह किसानों तक सीधे वित्तीय सहायता पहुँचाने के लिए एक महत्त्वपूर्ण संस्थागत तंत्र की भूमिका को रेखांकित करता है।
पीएम-किसान के तहत धनराशि अंतरण की प्रक्रिया
यह प्रक्रिया पीएम-किसान पोर्टल, मोबाइल ऐप या कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से किसानों के पंजीकरण से शुरू होती है। राज्य सरकारें पात्रता का सत्यापन करती हैं और लाभार्थियों का विवरण पोर्टल पर अपलोड करती हैं। इसके बाद, प्रणाली आधार और बैंक खाते के विवरण का सत्यापन करती है तथा अपात्र आवेदकों को छाँटकर अलग कर देती है। राज्य सरकार से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद, खाते के सत्यापन के लिए डेटा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) को भेजा जाता है। पात्र अभिलेखों के आधार पर धनराशि अंतरण के अनुरोध और भुगतान आदेश तैयार किए जाते हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग स्वीकृति आदेश जारी करता है। इसके बाद, प्रायोजक बैंकों और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है। अंततः, धनराशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कर दी जाती है, जिससे लाभों का त्वरित, पारदर्शी और कुशल वितरण सुनिश्चित होता है।
लक्षित लाभार्थियों का चयन, लाभार्थियों की पहचान और डेटाबेस प्रबंधन
राज्य सरकारें पात्र किसान परिवारों की पहचान करने और लाभार्थियों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करने के लिए जिम्मेदार हैं। इस डेटाबेस में नाम, आयु, श्रेणी, आधार संख्या, बैंक खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर जैसे प्रमुख विवरण शामिल होते हैं। दोहरे भुगतान को रोकने के लिए राज्य सरकारें इन अभिलेखों की सटीकता सुनिश्चित करती हैं। लाभों का निर्बाध प्रत्यक्ष लाभ अंतरण संभव बनाने के लिए इन अभिलेखों को नियमित रूप से अद्यतन किया जाता है, डिजिटाइज़ किया जाता है तथा आधार और बैंक खाते की जानकारी से जोड़ा जाता है।
पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए पात्र लाभार्थियों की सूचियाँ गाँव के स्तर पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाती हैं। इससे उन किसानों को भी, जो अनजाने में लाभार्थियों की सूची से बाहर रह गए हों, उचित शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से अपना नाम शामिल करवाने का अवसर मिलता है। इसके अतिरिक्त, राज्य और केंद्रशासित प्रदेश उन लाभों की वसूली की कार्रवाई करते हैं, जो अपात्र व्यक्तियों को वितरित किए गए हैं। इनमें आयकरदाता, सरकारी कर्मचारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मचारी और संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति शामिल हैं। दिसंबर 2025 तक, देशभर में अपात्र लाभार्थियों से कुल 416.75 करोड़ रुपये की राशि वसूल की जा चुकी है।
बहु स्तरीय निगरानी एवं शिकायत निवारण ढाँचा
पीएम-किसान योजना की निगरानी राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तरों पर कार्यरत बहु स्तरीय संस्थागत ढाँचे के माध्यम से की जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर, समीक्षा तंत्र की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करते हैं। राज्य और जिला निगरानी समितियाँ अपने - अपने अधिकार क्षेत्रों में योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करती हैं।
किसान पीएम-किसान पोर्टल और केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। इससे शिकायतों का समयबद्ध निपटारा और पारदर्शी शिकायत प्रबंधन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान, पीएम-किसान पोर्टल पर कुल 24,605 शिकायतें दर्ज की गईं।
पीएम-किसान के तहत प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवा वितरण प्रणाली
पीएम-किसान योजना को किसान-केंद्रित डिजिटल अवसंरचना का समर्थन प्राप्त है, जो लाभों तक पहुँच को सुगम बनाती है और उनके वितरण में पारदर्शिता बढ़ाती है। आधार-आधारित प्रमाणीकरण इस प्रणाली का एक प्रमुख स्तंभ है, जो लाभार्थियों की सुरक्षित पहचान और भुगतान के सत्यापन को सुगम बनाता है। किसान निम्नलिखित तरीकों से ई-केवाईसी पूरी कर सकते हैं:
चेहरे के माध्यम से प्रमाणीकरण
पीएम-किसान वेब पोर्टल लाभार्थियों के पंजीकरण, सत्यापन और डेटा प्रबंधन के लिए केंद्रीय डिजिटल मंच के रूप में कार्य करता है। यह किसानों का एक एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस बनाए रखता है और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के साथ एकीकरण के माध्यम से धनराशि के अंतरण को सुगम बनाता है। यह देशभर में वित्तीय लेन– देन की वास्तविक समय में निगरानी करने की सुविधा भी प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, पोर्टल लाभार्थी किसानों की स्थान वार सूचियाँ उपलब्ध कराता है, जिससे कार्यक्रम के कार्यान्वयन में पारदर्शिता बढ़ती है।
पोर्टल की पूरक व्यवस्था के रूप में, वर्ष 2020 में शुरू किया गया पीएम-किसान मोबाइल एप्लिकेशन इन सेवाओं का विस्तार मोबाइल उपयोगकर्ताओं तक करता है। इस एप्लिकेशन के माध्यम से किसान स्वयं पंजीकरण कर सकते हैं, लाभों के अंतरण की स्थिति का पता लगा सकते हैं और ई-केवाईसी सत्यापन पूरा कर सकते हैं। वर्ष 2023 में, एप्लिकेशन को चेहरा प्रमाणीकरण सुविधा के साथ अद्यतन किया गया। इसके माध्यम से किसान अपने चेहरे को स्कैन करके ई-केवाईसी पूरी कर सकते हैं, जिससे ओटीपी या फिंगरप्रिंट-आधारित सत्यापन की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। इस प्रकार, यह उपाय योजना तक किसानों की पहुँच को सुगम बनाने में महत्त्वपूर्ण साबित हुआ है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहायता प्रणाली: किसान-ईमित्र
सितंबर 2023 में, सरकार ने किसान –ई मित्र की शुरुआत की। यह पीएम-किसान डिजिटल इकोसिस्टम के साथ एकीकृत ए आई आधारित चैटबॉट है। इसे एकस्टेप फाउंडेशन और भाषिणी के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है। यह चैटबॉट किसानों को कई भारतीय भाषाओं में भुगतान, पंजीकरण और योजना के अंतर्गत पात्रता से संबंधित जानकारी वास्तविक समय में प्रदान करता है।
यह प्लेटफ़ॉर्म 11 प्रमुख भाषाओं : हिंदी, अंग्रेज़ी, तमिल, बांग्ला, ओड़िया, मलयालम, गुजराती, पंजाबी, तेलुगु, मराठी और कन्नड़—में 24/7 सहायता प्रदान करता है। इससे विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि वाले उपयोगकर्ताओं के लिए इस सेवा तक पहुँच आसान हो जाती है। वॉयस – एंड टेक्स्ट- बेस्ड क्वेरी के माध्यम से किसान अपने आवेदनों की स्थिति जाँच सकते हैं, भुगतान संबंधी अपडेट प्राप्त कर सकते हैं और योजना से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं।
निरंतर आय सहायता के माध्यम से कृषि क्षेत्र की सुदृढ़ता का निर्माण
पीएम-किसान योजना समय पर प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करके किसानों की आय सुरक्षा का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरी है। इसकी 24वीं किस्त का वितरण इस प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है, जिसके तहत 9.34 करोड़ से अधिक किसानों तक 18,690 करोड़ रुपये की राशि पहुँचाई गई। 4.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के संचयी वितरण के साथ, यह योजना कृषि निवेश और ग्रामीण परिवारों की स्थिरता को समर्थन प्रदान करना जारी रखे हुए है।इसकी प्रौद्योगिकी-सक्षम लाभ वितरण प्रणाली पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक पहुँच को बढ़ावा देती है। वर्ष 2030-31 तक योजना को जारी रखने की स्वीकृति किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को और रेखांकित करती है। कृषि इनपुट में निवेश करने और कृषि गतिविधियों को निरंतर जारी रखने की किसानों की क्षमता को मजबूत करके, पीएम-किसान योजना समावेशी कृषि विकास और भारत के कृषक समुदाय की समृद्धि के व्यापक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
https://x.com/pmkisanofficial?lang=en
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2330171®=48&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2292437®=48&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2275744®=48&lang=2


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