रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा आयोजित सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) प्रमुखों का 8वां अखिल भारतीय सम्मेलन 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सफलतापूर्वक समाप्त हुआ। इसने नई सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करने, श्रेष्ठ व्यवस्था साझा करने और आरपीएफ, जीआरपी और राज्य पुलिस के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए एक मंच प्रदान किया।

इस उच्चस्तरीय सम्मेलन की अध्यक्षता आरपीएफ की महानिदेशक सुश्री सोनाली मिश्रा ने की। इसमें रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ श्री सतीश कुमार, रेलवे बोर्ड के सदस्य और अलग-अलग राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के जीआरपी प्रमुख शामिल हुए।

इस सम्मेलन की एक प्रमुख विशेषता रेल सूचना प्रणाली केंद्र (क्रिस) द्वारा जीआरपी कर्मचारियों को रेलमदद प्लेटफॉर्म से जोड़ना रही। इसका उद्देश्य यात्री शिकायत निवारण व्यवस्था को बेहतर बनाना, समय पर जानकारी साझा करना और शिकायतों की बेहतर निगरानी करना था।

इसमें रेल सुरक्षा और यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न पहलों पर विस्तार से चर्चा की गई।

दक्षिण मध्य रेलवे के “पिंक पेट्रोल: आइज़ इन द स्काई, शक्ति ऑन द ग्राउंड” में महिलाओं के नेतृत्व वाला एक मॉडल दिखाया गया, जिसमें शक्ति फ्रेमवर्क के तहत द्रुत कार्यबलों के साथ ड्रोन-से निगरानी को शामिल किया गया।

इस सम्मेलन में ट्रेनों पर पत्थरबाजी को एक चुनौती बताया गया और पत्थरबाजी के प्रमुख स्थानों पर गश्ती, बेहतर निगरानी, ​​अपराधियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई, युवाओं तक पहुंच और आरपीएफ-जीआरपी के बीच मजबूत तालमेल पर जोर दिया गया। इसके लिए समाज में जागरूकता और रोकथाम के लिए लोगों तक पहुंच को महत्वपूर्ण माना गया।

सम्मेलन में दिवाली, छठ और अन्य त्योहारों के दौरान भीड़ प्रबंधन पर भी चर्चा हुई। उत्तरी रेलवे के दिल्ली मंडल ने दिल्ली पुलिस, जीआरपी और दिल्ली मेट्रो के प्राधिकारियों के साथ मिलकर किए गए कार्या के बारे में बताया। इसमें सीसीटीवी से निगरानी, सार्वजनिक घोषणा, बैरिकेडिंग, निर्धारित ठहराव क्षेत्र और विशेष नियंत्रण कक्ष शामिल थे। व्यस्ततम समय में यात्रियों की सुरक्षा और यात्रियों के व्यवस्थित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए अग्रिम योजना, प्रभावी यात्री आवागमन प्रबंधन और सुरक्षाकर्मियों की समन्वित तैनाती पर ज़ोर दिया गया।

मध्य रेलवे के पुणे मंडल ने प्रोजेक्ट दिशा (सुरक्षा, सामन्जस्य और जागरूकता के लिए समर्पित पहल) के बारे में बताया। यह एक ऐसी पहल है जिसका उद्देश्य रेलवे पटरियों के पास रहने वाले बच्चों को शैक्षणिक और मनोरंजनात्मक गतिविधियों, सुरक्षा जागरूकता सत्रों और सामादायिक उपायों के माध्यम से जोड़ना है। गैर-सरकारी संगठनों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से रेलवे सुरक्षा और जिम्मेदार व्यवहार के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाती है। साथ ही, पत्थरबाजी, चोरी, अनाधिकृत प्रवेश और अन्य असुरक्षित गतिविधियों को रोकने का प्रयास किया जाता है।

सम्मेलन में आरपीएफ और जीआरपी के लिए संयुक्त प्रशिक्षण, तोड़फोड़ की घटनाओं को रोकना, और नशीले पदार्थों का पता चलने पर तुरंत जानकारी साझा करने जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। इसके अलावा, डिजिटल साक्ष्यों को संभालने, मानक प्रक्रियाओं को अपनाने, खुफिया जानकारी साझा करने, जांच क्षमताओं को मजबूत करने और सहायक बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया गया।

सभा को संबोधित करते हुए, रेलवे बोर्ड की अध्यक्ष और सीईओ ने भारतीय रेलवे के सामने आ रही सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए रेलवे अधिकारियों, आरपीएफ, जीआरपी और राज्य पुलिस के बीच आपसी समन्वय, तकनीकी प्रगति, नवाचार और साझा प्रतिबद्धता के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने यात्रियों का भरोसा जीतने, विनम्र और पेशेवर पुलिसिंग सुनिश्चित करने, तथा उत्पादकता और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए तकनीक और नवाचार का उपयोग करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

सम्मेलन का समापन महानिदेशक, रेलवे सुरक्षा बल के संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने रेलवे सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 'आसूचना आधारित पुलिस व्यवस्था’ की आवश्यकता पर बल दिया।

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