राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने access and benefit sharing व्यवस्था के तहत 29 राज्य जैव विविधता परिषदों और एक केंद्र शासित प्रदेश की परिषद को कुल 1.19 करोड़ रुपये वितरित करने की जानकारी दी है।
प्राधिकरण के मुताबिक individual beneficiaries की पहचान संभव न होने पर कृषि क्षेत्रों के अनुमानित अनुपात के आधार पर वितरण पद्धति अपनाई गई। इसके लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के integrated agriculture statistics portal के आंकड़ों को आधार बताया गया है।
इस योगदान में मक्का, चावल, बाजरा और कपास जैसे कृषि जैव संसाधनों का उपयोग शामिल है। संबंधित कंपनियों से मिले योगदान को जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 32(2) के तहत निर्धारित गतिविधियों में लगाया जाएगा। इनमें जैव विविधता का दस्तावेजीकरण और संरक्षण, सतत उपयोग, स्थानीय governance, research, क्षमता निर्माण और सामुदायिक आजीविका शामिल हैं।
प्राधिकरण ने कहा है कि कृषि क्षेत्र से प्राप्त 86 करोड़ रुपये अब तक अलग-अलग लाभार्थियों को वितरित किए गए हैं, जबकि कुल benefit-sharing वितरण 203 करोड़ रुपये से अधिक है। ये आंकड़े प्राधिकरण की आधिकारिक विज्ञप्ति पर आधारित हैं।




