पोलैंड के 19 सदस्यीय युवा प्रतिनिधिमंडल ने जामसाहेब स्मृति युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के दूसरे संस्करण के तहत भारत की यात्रा पूरी की है। युवा मामले और खेल मंत्रालय की 16 अक्टूबर की विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम 7 से 14 अक्टूबर 2026 तक चला। इस दौरान दल गुजरात, महाराष्ट्र और नई दिल्ली गया तथा भारत-पोलैंड के साझा इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और संस्थानों से परिचित हुआ।

यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव गुजरात के जामनगर स्थित बालाचडी पोलिश बाल शिविर स्मारक था। यह स्मारक महाराजा जामसाहेब दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जाडेजा के मानवीय योगदान की याद दिलाता है। मंत्रालय के अनुसार, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने विस्थापित पोलिश बच्चों को शरण, शिक्षा और चिकित्सा सहायता दी थी। पोलैंड में उन्हें ‘डोब्री महाराजा’, यानी अच्छे महाराजा के रूप में याद किया जाता है।

प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में वलिवडे पोलिश शरणार्थी शिविर स्मारक भी देखा। यह स्थल द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान और उसके बाद भारत में हजारों पोलिश शरणार्थियों को मिली शरण से जुड़ा है। दोनों स्मारकों की यात्राओं से युवाओं को द्विपक्षीय संबंधों के इस ऐतिहासिक पक्ष को समझने का अवसर मिला।

नई दिल्ली में केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने प्रतिनिधिमंडल के साथ रात्रिभोज पर संवाद किया। दल ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात की। कार्यक्रम में गांधीनगर के दांडी कुटीर और महात्मा गांधी के जन्मस्थल पोरबंदर स्थित कीर्ति मंदिर की यात्रा शामिल थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2024 की पोलैंड यात्रा के दौरान इस कार्यक्रम की घोषणा की थी। यह भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी की 2024–2028 कार्ययोजना का हिस्सा है। इसके तहत पोलैंड के युवाओं की वार्षिक भारत यात्रा का प्रावधान है, ताकि वे साझा इतिहास के साथ समकालीन भारत को भी समझ सकें।