पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भारतीय नौवहन निगम (एससीआई) से भारत के आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी जहाज निर्माण और समुद्री क्षमता हासिल करने के अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। यह बात उन्होंने आज मुंबई के इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल पर आयोजित समारोह में कही। इस समारोह में कंपनी ने अपने कामकाज के 65 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल सर्बानंद सोनोवाल ने देश की सेवा में साढ़े छह दशक पूरे करने पर एससीआई को बधाई दी। उन्होंने भारत की ऊर्जा और व्यापार सुरक्षा को सुरक्षित रखने में कंपनी की भूमिका पर बल दिया। मंत्री ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के हाल के संकट के दौरान इसके प्रदर्शन का जिक्र किया। केंद्रीय मंत्री ने एससीआई से सरकार के 'विकसित भारत' और 'आत्मनिर्भर भारत' लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद करने का आग्रह किया। उन्होंने मजबूत राष्ट्रीय बेड़े को 2047 तक शीर्ष जहाज निर्माण और जहाज-मालिक देश बनने की भारत की महत्वाकांक्षा के लिए केंद्रीय बिंदु बताया।

सोनोवाल ने कहा, "एससीआई समुद्र में भारत की अपनी ताकत बनाने का सबसे स्पष्ट उदाहरण है।" उन्होंने कहा, "चूंकि भारत 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के अंतर्गत शीर्ष जहाज निर्माण देश बनने की दिशा में काम कर रहा है, इसलिए एससीआई का बेड़ा, उसके लोग और उसकी साझेदारियां इस मिशन के लिए केंद्र में होंगे।"

1961 में 19 जहाजों वाली लाइनर शिपिंग कंपनी के रूप में स्थापित, एससीआई अब विविध समुद्री उद्यम बन गई है जो कुल 5.26 मिलियन डेडवेट टनेज (डीडब्ल्यूटी) वाले 58 जहाजों का संचालन करती है। कंपनी के कामकाज में अब क्रूड और प्रोडक्ट टैंकर, बल्क और कंटेनर शिपिंग, एलपीजी और एलएनजी कैरियर, ऑफशोर सेवाएं, यात्री और तटीय परिवहन, प्रोजेक्ट कार्गो, जहाज प्रबंधन और जहाज निर्माण परामर्श शामिल हैं।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत अब सिर्फ़ जहाज़ों का मालिक बनकर संतुष्ट नहीं है, बल्कि हम उन्हें यहीं अपने देश में बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इन दशकों में एससीआई की तरक्की यह दिखाती है कि जब राष्ट्रीय संकल्प का साथ मिले, तो भारतीय उद्यम क्या कुछ हासिल कर सकते हैं। जैसे-जैसे एससीआई अपने बेड़े का विस्तार कर रहा है और साझेदारियों को मज़बूत कर रहा है, यह न केवल एक कंपनी को, बल्कि भारत के पूरे जहाज़ निर्माण के लक्ष्य को भी मज़बूत कर रहा है और हमें 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर कदम-दर-कदम आगे ले जा रहा है।"

महाराष्ट्र के मत्स्य पालन और बंदरगाह मंत्री और इस कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि, नितेश नारायण राणे ने महाराष्ट्र और मुंबई के साथ एससीआई के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था के व्यापार, रोज़गार और व्यापक विकास के लिए मज़बूत शिपिंग इकोसिस्टम ज़रूरी है।

एससीआई के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्टन बी.के. त्यागी ने आने वाले वर्षों के लिए कंपनी की योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने भारत की शिपिंग क्षमता और टनेज को बढ़ाने के राष्ट्रीय प्रयासों के समर्थन में बड़ा, आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बेड़ा बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

एससीआई समुद्री क्षेत्र के लिए सरकार की विस्तारित नीति और वित्तीय सहायता के समर्थन से अपने बेड़े को बढ़ाने का कार्यक्रम चला रहा है। इसमें इंडियन ऑयल के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और भारत कंटेनर शिपिंग लाइन के साथ प्रस्तावित संयुक्त उद्यम शामिल हैं, जो एमएकेवी 2047 लक्ष्यों की दिशा में तेज़ी से विस्तार की नींव रख रहे हैं।

एससीआई भारत की समुद्री क्षमता को मज़बूत करने, देश की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा का समर्थन करने और जहाज़ निर्माण व टनेज से जुड़े व्यापक लक्ष्यों में योगदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। कंपनी 'विकसित भारत' और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में विकास के अपने अगले चरण में प्रवेश कर रही है।