केन्द्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज हयात रीजेंसी, नई दिल्ली में भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा 'मैटेरियल्स रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया(एमआरएआई)' के सहयोग से आयोजित "भारत का महत्वपूर्ण खनिज पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र और चक्रीय अर्थव्यवस्था" विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया।

इस एक दिवसीय संगोष्ठी में भारत के महत्वपूर्ण खनिज पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रणेताओं, पुनर्चक्रणकर्ताओं, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों ने एक साथ मिलकर विचार-विमर्श किया।

अपने मुख्य संबोधन में, श्री जी. किशन रेड्डी ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, रक्षा तैयारियों, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उन्नत विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने पुराने या उपयोग की अवधि पूरी कर चुके उत्पादों से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा देने और घरेलू पुनर्चक्रण क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सरकार, उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया।

केन्द्रीय मंत्री ने नवीन तकनीकों, उद्यमिता, जिम्मेदार ई-कचरा प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया। जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने नागरिकों से ई-कचरे और उपयोग की अवधि-पूरी-कर-चुके(ईओएल) उत्पादों को महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति के लिए मूल्यवान संसाधन के रूप में देखने का आग्रह किया। उन्होंने उद्योग जगत, कंपनियों और शोधकर्ताओं से अपने विचार साझा करने तथा विकसित भारत के विजन के अनुरूप तकनीक-आधारित और टिकाऊ पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया।

कोयला एवं खान राज्य मंत्री, श्री सतीश चंद्र दुबे ने संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने और एक चक्रीय एवं आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण क्षमताओं को मजबूत करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन और ई-कचरे के पुनर्चक्रण के प्रति जागरूकता को व्यापक जनभागीदारी तथा गांव-गांव तक पहुंच के माध्यम से जमीनी स्तर तक ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि पुनर्चक्रण योग्य संसाधनों को औपचारिक पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र में पहुंचाया जा सके।

खान मंत्रालय के सचिव, श्री केशव चंद्र ने स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा तथा अन्य रणनीतिक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने अन्वेषण, प्रसंस्करण, पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण को शामिल करते हुए एक मजबूत घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया।

श्री केशव चंद्र ने बताया कि ई-कचरा, औद्योगिक अपशिष्ट और उपयोग की अवधि पूरी कर चुकी अन्य सामग्रियां महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति के लिए प्रमुख द्वितीयक स्रोत के रूप में काम कर सकती हैं। इससे संसाधनों के कुशल उपयोग में सुधार, प्राथमिक स्रोतों पर निर्भरता में कमी और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। उन्होंने भारत की महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सभी हितधारकों द्वारा स्पष्ट जिम्मेदारियों और निर्धारित समय-सीमा के साथ समन्वित एवं समयबद्ध कार्रवाई का आह्वान किया।

संगोष्ठी के दौरान, केन्द्रीय मंत्रियों ने महत्वपूर्ण खनिज पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र पर अवधारणा पत्र भी जारी किया। इसमें भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा प्रस्तुत की गई है, जिसमें संसाधनों के कुशल उपयोग, द्वितीयक स्रोतों से खनिजों की पुनर्प्राप्ति तथा एक चक्रीय और आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।

संगोष्ठी में महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण और ई-कचरे के संग्रहण; लिथियम-आयन बैटरियों से धातुओं की पुनर्प्राप्ति और ब्लैक मास के निर्यात; अलौह धातुओं के पुनर्चक्रण; तथा महत्वपूर्ण खनिजों और अलौह धातुओं के पुनर्चक्रण से संबंधित परिदृश्य पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में तकनीकी प्रगति, अनुसंधान एवं विकास, ई-कचरे का संग्रहण, लिथियम-आयन बैटरियों और अन्य उपयोग की अवधि पूरी कर चुकी सामग्रियों से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति, ब्लैक मास का प्रसंस्करण तथा पुनर्चक्रण क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नीतिगत उपायों पर चर्चा की गई।

खान मंत्रालय सतत संसाधन उपयोग की दिशा में अपने व्यापक प्रयासों के तहत जिम्मेदार ई-कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। विशेष अभियान 6.0 और ‘स्वच्छता ही सेवा’ के संदर्भ में, मंत्रालय ई-कचरे के प्रति जागरूकता बढ़ाने, ई-कचरे के जिम्मेदार निपटान तथा उसे औपचारिक पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र में ले जाने को बढ़ावा दे रहा है। ये प्रयास चक्रीय अर्थव्यवस्था, संसाधनों के कुशल उपयोग और महत्वपूर्ण खनिजों सहित मूल्यवान सामग्रियों के सतत प्रबंधन पर मंत्रालय के व्यापक ध्यान के अनुरूप हैं।

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