केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन में आयोजित एक हाइब्रिड कार्यक्रम के दौरान डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) 3.0 के परिचालन दिशानिर्देशों का औपचारिक रूप से शुभारंभ किया। इस शुभारंभ कार्यक्रम में देशभर के राज्यों के राजस्व एवं पंजीकरण मंत्रियों, प्रधान सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि डीआईएलआरएमपी 3.0 ग्रामीण नागरिकों, किसानों और संपत्ति मालिकों के लिए ईज ऑफ लिविंग (जीवन को आसान बनाने) बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत में भूमि का संबंध भावनात्मक और पारिवारिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है, इसलिए भूमि से संबंधित सटीक और आसानी से उपलब्ध दस्तावेजीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “भूमि केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं है, यह हमारे किसानों का गौरव, हमारे पूर्वजों का आशीर्वाद और भावी पीढ़ियों की पहचान है।”

श्री शिवराज सिंह चौहान ने रेखांकित किया कि डीआईएलआरएमपी के पिछले चरणों ने 99.90 प्रतिशत अधिकारों के अभिलेखों (आरओआर) और 97 प्रतिशत कैडस्ट्रल मैप्स का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण कर दिया है, साथ ही 99 प्रतिशत सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (एसआरओ) का कंप्यूटरीकरण भी पूरा हो चुका है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि डीआईएलआरएमपी 3.0 अब अलग-अलग स्तर पर डिजिटलीकरण से आगे बढ़कर पूर्ण प्रणाली एकीकरण की ओर कदम बढ़ाते हुए मानकों को और ऊंचा उठा रहा है, जिससे किसानों को संस्थागत ऋण आसानी से मिल सके और नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने से मुक्ति मिले।

इस अवसर पर बोलते हुए, ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने रेखांकित किया कि डीआईएलआरएमपी 3.0 स्थानिक सटीकता, जियो-रेफरेंस्ड मैप और विभागों के बीच आसानी से काम करने की क्षमता पर ध्यान केंद्रित करके पुरानी चुनौतियों का समाधान करेगा।

भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) के सचिव श्री नरेंद्र भूषण ने स्वागत भाषण दिया और दिशानिर्देशों का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए कहा कि डीआईएलआरएमपी 3.0 भूमि प्रशासन के लिए एक एकीकृत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के निर्माण की दिशा में एक बदलाव का प्रतीक है। संयुक्त सचिव (एलआर) श्री पारिकिपांडला नरहरि ने तकनीकी संरचना और योजना के घटकों का विवरण देते हुए एक व्यापक प्रस्तुति दी।

डीआईएलआरएमपी 3.0 के मुख्य बिंदु:

डीआईएलारएमपी 3.0 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषण के साथ चरणबद्ध और प्रदर्शन-आधारित व्यवस्था के तहत लागू किया जाएगा। इस प्रक्रिया का प्रबंधन सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से किया जाएगा। कार्यक्रम की प्रगति की वास्तविक समय में निगरानी उन्नत डीआईएलआरएमपी-एमआईएस डैशबोर्ड के माध्यम से की जाएगी, जिसकी देखरेख परियोजना अनुमोदन एवं निगरानी समिति (पीएसएंडएमसी) द्वारा की जाएगी। कार्यक्रम का समापन भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) के निदेशक द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।